प्रस्तावना (Introduction)
मध्यकालीन राजनीतिक चिंतन में मार्सिलियस ऑफ पडुआ (Marsilius of Padua) का विशेष स्थान है। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति डिफेन्सर पैसिस (Defensor Pacis) में राज्य, चर्च और कानून के संबंधों पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
मार्सिलियस ने विशेष रूप से कानून (Law) के दो मुख्य प्रकारों की चर्चा की, जो आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की नींव माने जाते हैं। इस लेख में हम सरल भाषा में उनके दोनों प्रकार के कानूनों को विस्तार से समझेंगे।
मार्सिलियस कौन थे? (Who Was Marsilius?)
मार्सिलियस ऑफ पडुआ 14वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध इतालवी दार्शनिक और राजनीतिक विचारक थे। उनका जन्म इटली के पडुआ में हुआ था।
उनकी सोच की मुख्य विशेषताएँ:
- राज्य की सर्वोच्चता का समर्थन
- चर्च के राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध
- जनता को कानून का स्रोत मानना
कानून की अवधारणा (Concept of Law)
मार्सिलियस के अनुसार, कानून वह नियम है जिसे समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाया जाता है और जिसका पालन करवाने के लिए दंड की शक्ति मौजूद होती है।
उन्होंने कानून को मुख्यतः दो प्रकार में विभाजित किया।
मार्सिलियस के अनुसार कानून के दो प्रकार
(Two Types of Laws According to Marsilius)
1. मानव निर्मित कानून (Human Law)
अर्थ (Meaning)
मानव निर्मित कानून वह है जिसे मनुष्यों द्वारा समाज की भलाई के लिए बनाया जाता है और जिसका पालन राज्य की शक्ति द्वारा करवाया जाता है।
English: Human Law is the law made by human authority and enforced by the state.
मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
- जनता या विधायिका द्वारा निर्मित
- राज्य द्वारा लागू
- उल्लंघन पर दंड निश्चित
- सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने हेतु
मार्सिलियस का दृष्टिकोण
मार्सिलियस ने कहा कि वास्तविक कानून वही है जिसमें दंड देने की शक्ति हो। इसलिए उन्होंने मानव कानून को सबसे महत्वपूर्ण माना।
उनके अनुसार:
“जहाँ दंड लागू करने की शक्ति है, वहीं वास्तविक कानून है।”
उदाहरण (Examples)
- संविधान (Constitution)
- दंड संहिता (Penal Code)
- यातायात नियम (Traffic Rules)
2. दैवी या ईश्वरीय कानून (Divine Law)
📌 अर्थ (Meaning)
दैवी कानून वह है जिसे ईश्वर से संबंधित माना जाता है और जो मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन का मार्गदर्शन करता है।
English: Divine Law is the law believed to be given by God for spiritual guidance.
मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
- धार्मिक ग्रंथों पर आधारित
- नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन
- राज्य द्वारा दंडित नहीं किया जाता
- परलोक से संबंधित परिणाम
मार्सिलियस का दृष्टिकोण
मार्सिलियस ने माना कि दैवी कानून महत्वपूर्ण है, लेकिन यह राजनीतिक शासन का आधार नहीं होना चाहिए क्योंकि इसमें दंड लागू करने की सांसारिक शक्ति नहीं होती।
उन्होंने चर्च के राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध करते हुए कहा कि:
- चर्च आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित रहे
- राज्य सांसारिक कानून चलाए
उदाहरण (Examples)
- धार्मिक आदेश
- नैतिक उपदेश
- पाप-पुण्य से जुड़े नियम
दोनों कानूनों में अंतर (Difference Between Two Laws)
| आधार | मानव कानून (Human Law) | दैवी कानून (Divine Law) |
|---|---|---|
| निर्माता | मनुष्य/विधायिका | ईश्वर से संबंधित |
| प्रवर्तन | राज्य द्वारा | धार्मिक विश्वास |
| दंड | तत्काल सांसारिक दंड | परलोकिक दंड |
| क्षेत्र | सामाजिक-राजनीतिक | आध्यात्मिक |
| महत्व (Marsilius) | सर्वोच्च | गौण |
मार्सिलियस के विचारों का महत्व (Importance)
मार्सिलियस के सिद्धांतों का आधुनिक राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा:
🌟 1. धर्म और राज्य का पृथक्करण
उन्होंने सेक्युलर राज्य की नींव रखी।
🌟 2. जनसत्ता का सिद्धांत
कानून का स्रोत जनता है—यह आधुनिक लोकतंत्र का आधार बना।
🌟 3. विधि का शासन (Rule of Law)
राज्य द्वारा लागू कानून को सर्वोच्च मानना।
आधुनिक संदर्भ (Modern Relevance)
आज लगभग सभी आधुनिक राज्यों में:
- संविधान सर्वोच्च है
- कानून संसद बनाती है
- धार्मिक कानून राजनीतिक शासन नहीं चलाते
यह सोच काफी हद तक मार्सिलियस के विचारों से प्रभावित है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मार्सिलियस ऑफ पडुआ ने कानून को दो भागों—मानव कानून और दैवी कानून—में बाँटकर राजनीतिक चिंतन को नई दिशा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य संचालन के लिए वही कानून प्रभावी है जिसे लागू करने की शक्ति राज्य के पास हो।
उनके विचार आधुनिक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राज्य की बुनियाद माने जाते हैं।

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